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आने वाले महीनों में भारतीय शेयर बाज़ार कैसा रहेगा? क्या बाज़ार में बड़ी तेज़ी आएगी या जियो-पॉलिटिकल तनाव और कच्चे तेल की अनिश्चितता निवेशकों का पैसा डुबो देगी? एक जानी-मानी ब्रोकरेज फर्म की हालिया रिपोर्ट के मुताबिक, निफ्टी 50 साल 2026 में 28,770 के बुल केस टारगेट तक पहुँच सकता है। अब, इस माहौल में निवेशकों को क्या खास स्ट्रैटेजी अपनानी होगी?

Nifty 50 को लेकर पॉज़िटिव रुख

साल 2026 के बाकी महीनों में भारतीय शेयर बाजार के लिए हालात पूरी तरह से एकतरफ़ा नहीं रहने वाले हैं। एक तरफ़ जियो-पॉलिटिकल टेंशन, कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव, रुपये की कमज़ोरी और विदेशी निवेशकों की बिकवाली जैसे रिस्क बाज़ार पर दबाव डाल सकते हैं।

दूसरी तरफ़, कमाई में सुधार, सरकारी कैपेक्स खर्च, प्राइवेट सेक्टर के निवेश में संभावित तेज़ी और ग्रामीण मांग में सुधार बाज़ार को नई मज़बूती दे सकते हैं।

ऐसे माहौल में ब्रोकरेज फर्म एक्सिस सिक्योरिटीज़ ने भारतीय शेयर बाजार को लेकर पॉज़िटिव लेकिन चुनिंदा निवेश की रणनीति अपनाने की सलाह दी है।

इस रिपोर्ट में ब्रोकरेज ने निफ्टी 50 को लेकर काफ़ी हद तक पॉज़िटिव रुख बनाए रखा है।

दिसंबर 2026 का टारगेट

ब्रोकरेज का निफ्टी 50 के लिए बुल केस दिसंबर 2026 का टारगेट 28,770 है। इस प्रोजेक्शन के लिए, निफ्टी की वैल्यू-टू-इनकम रेशियो 20.5 गुना तय की गई है।

ब्रोकरेज का मानना ​​है कि, अगर प्राइवेट सेक्टर का कैपेक्स खर्च बढ़ता है, पॉलिसी लेवल पर कंटिन्यूटी बनी रहती है, बिजनेस कॉन्फिडेंस बेहतर होता है, रूरल इकोनॉमी मजबूत होती है और टैरिफ से जुड़ी ग्लोबल अनिश्चितताएं कम होती हैं, तो मार्केट में वैल्यूएशन फिर से बढ़ने की गुंजाइश हो सकती है।

साथ ही, FY23-FY28 के दौरान निफ्टी कंपनियों की कमाई में 13% से ज़्यादा की सालाना ग्रोथ की उम्मीद इस पॉजिटिव सेंटिमेंट को सपोर्ट कर सकती है।

शॉर्ट में 28,770 का लेवल?

एक्सिस सिक्योरिटीज का बेस केस दिसंबर 2026 के लिए 27,360 का निफ्टी टारगेट है, जो दिसंबर 2027 के अनुमानित प्रॉफिट के 19.5 गुना वैल्यूएशन के आधार पर तय किया गया है। शॉर्ट में, 28,770 का लेवल कोई फिक्स्ड अनुमान नहीं है बल्कि एक बुल केस है, जो बेहतर कंडीशन में होता है।

यही वजह है कि, साल के बाकी महीनों में इन्वेस्टर्स को सिर्फ निफ्टी लेवल पर दांव लगाने के बजाय अर्निंग्स वाले स्टॉक्स के सिलेक्शन पर फोकस करना चाहिए। एक्सिस सिक्योरिटीज ने अपनी सितंबर स्ट्रेटेजी का नाम “बाय अर्निंग्स, नॉट लिक्विडिटी” रखा है।

इसका मतलब है कि, मार्केट में मौजूद डोमेस्टिक कैश (लिक्विडिटी) के आधार पर शेयर खरीदने के बजाय, उन कंपनियों को प्रायोरिटी देनी चाहिए जिनकी अर्निंग्स की दिशा साफ है और बिजनेस फंडामेंटल्स मजबूत हैं।

स्ट्रैटेजी का सबसे ज़रूरी हिस्सा

ब्रोकरेज की स्ट्रैटेजी का सबसे ज़रूरी हिस्सा यह है कि, इन्वेस्टर्स को एक बार में अपना पूरा कैपिटल मार्केट में नहीं लगाना चाहिए।

रिपोर्ट में 10-15 परसेंट लिक्विडिटी बनाए रखने और मार्केट में गिरावट का इस्तेमाल करके धीरे-धीरे अच्छी क्वालिटी वाले स्टॉक्स में पोजीशन बनाने की सलाह दी गई है।

एक्सिस के मुताबिक, जिन कंपनियों की अर्निंग्स विज़िबिलिटी मज़बूत है, उन्हें 12-18 महीने के नज़रिए से धीरे-धीरे बढ़ाया जा सकता है।

दिसंबर तक की स्ट्रैटेजी में भी, मार्केट में हर गिरावट को घबराने के बजाय सबसे अच्छी क्वालिटी वाले स्टॉक्स में धीरे-धीरे खरीदने के मौके के तौर पर देखा जा सकता है।

सेक्टोरल आउटलुक

रिपोर्ट में बाकी साल के लिए सेक्टोरल आउटलुक भी साफ है। एक्सिस सिक्योरिटीज ने बैंकिंग-फाइनेंशियल सर्विसेज़ (BFSI), टेलीकॉम, हेल्थकेयर सर्विसेज़, ऑटो और पावर एंड एनर्जी जैसे सेक्टर्स पर ज़्यादा वेटेज रखने की बात कही है।

इसके अलावा, ब्रोकरेज ने अपनी रिपोर्ट में कुछ चुनिंदा रिटेल कंजम्प्शन से जुड़ी कंपनियों पर पॉजिटिव नजरिया रखा है। इसका मतलब यह नहीं है कि, इन्वेस्टर्स को एक ही बार में इन सभी सेक्टर्स में पैसा लगाना चाहिए।

रिपोर्ट का मेन मैसेज सेक्टर लेवल के बजाय कंपनी लेवल पर सिलेक्शन करना है। इसमें मजबूत बैलेंस शीट, क्लियर अर्निंग्स और अच्छी बिजनेस डिमांड वाले स्टॉक्स को प्रायोरिटी देने की बात कही गई है।

IT इंडेक्स में भारी बिकवाली

टेक सेक्टर में एक्सिस का रुख भी बैलेंस्ड है। अगस्त के आखिर में IT स्टॉक्स में वापसी हुई और 28 अगस्त को निफ्टी IT में करीब 3.5 परसेंट की बढ़त हुई। एनवीडिया के मजबूत नतीजों और AI से जुड़े इंफ्रास्ट्रक्चर पर बढ़ते खर्च ने इस सेक्टर में इन्वेस्टर्स की दिलचस्पी फिर से बढ़ा दी।

हालांकि, बुधवार, 9 सितंबर को IT इंडेक्स में भारी बिकवाली देखी गई और इंडेक्स 3 परसेंट तक गिर गया। ऐसे में ब्रोकरेज इस सेक्टर में बड़ी खरीदारी के बजाय चुनिंदा IT कंपनियों, खासकर मिडकैप कंपनियों को प्राथमिकता दे रहे हैं।

ऐसे में जिन कंपनियों के पास मजबूत AI कैपेबिलिटी, डिजिटल इंजीनियरिंग पर अच्छी पकड़, बड़े बदलाव के दम पर डील और भविष्य की ग्रोथ की बेहतर विजिबिलिटी है, उन पर नजर रखी जा सकती है।

28,770 का बुल केस तभी बनेगा जब पॉजिटिव सेंटिमेंट बना रहेगा। एक्सिस सिक्योरिटीज ने US-ईरान टेंशन का फिर से बढ़ना, कच्चे तेल में तेज बढ़ोतरी, रुपये में और कमजोरी, US ट्रेजरी पर यील्ड का 4.75% से ऊपर रहना, विदेशी इन्वेस्टर्स द्वारा फिर से बिकवाली और उम्मीद से कमजोर Q2FY27 नतीजों को मुख्य रिस्क के तौर पर पहचाना है।

नोट: यहां दी गई जानकारी सिर्फ़ जानकारी के लिए है। मार्केट में इन्वेस्ट करने में रिस्क हो सकता है। इन्वेस्ट करने से पहले कृपया अपने फाइनेंशियल एडवाइजर या मार्केट एक्सपर्ट से सलाह लें।

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