भारतीय संस्कृति में सोना सिर्फ़ सजावट का ज़रिया नहीं है, बल्कि पीढ़ियों से इसे सबसे भरोसेमंद और सुरक्षित दौलत के तौर पर देखा जाता रहा है।
हाल ही में सोने की कीमत में रिकॉर्ड तोड़ बढ़ोतरी देखने को मिली। ‘सोना’, जिसे मुश्किल समय की एक कड़ी माना जा रहा है, उसने सभी इन्वेस्टर्स का ध्यान खींचा है।
साल 2036 तक सोने की कीमत कितनी बढ़ सकती है?
ऐसे समय में, सबके मन में बस एक ही सवाल है कि, अगर आज सोने में ₹50,000 इन्वेस्ट किए जाएं, तो अगले 10 सालों में यानी साल 2036 तक इसकी कीमत कितनी बढ़ सकती है?
सोने को हमेशा से न सिर्फ़ ज्वेलरी के तौर पर बल्कि भारतीय घरों में सबसे भरोसेमंद एसेट के तौर पर भी चुना गया है।
रिकॉर्ड ऊंचाई छूने के बाद आज हर इन्वेस्टर के मन में एक ही सवाल है कि, अगर आज सोने में ₹50,000 इन्वेस्ट किए जाएं, तो अगले 10 साल यानी साल 2036 तक इसकी वैल्यू क्या हो सकती है?
वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के आंकड़ों और पुराने रिटर्न के आधार पर आइए आसान शब्दों में समझते हैं कि, अलग-अलग कंपाउंड सालाना रिटर्न (CAGR) के आधार पर साल 2036 तक आपका ₹50,000 का इन्वेस्टमेंट कितना बढ़ सकता है।
एक दशक में सोने की कीमतें तेज़ी से बढ़ी हैं
भविष्य का अंदाज़ा लगाने से पहले यह देखना ज़रूरी है कि, पिछले एक दशक में सोने की कीमतें कितनी तेज़ी से बढ़ी हैं। साल 2016 में, 10 ग्राम (24 कैरेट) सोने की औसत कीमत लगभग ₹28,623 थी। साल 2026 में, यह बढ़कर लगभग ₹1,53,250 प्रति 10 ग्राम हो गई है।
पिछले 10 सालों में सोने की कीमतें करीब 5.35 गुना बढ़ी हैं, यानी करीब 18.6% का सालाना रिटर्न मिला ऐसा मान लेते है।
वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के मुताबिक, अकेले साल 2025 में सोने ने 60% से ज़्यादा का रिटर्न दिया। आपको बता दें कि, मौजूदा कीमत पर ₹50,000 में करीब 3.26 ग्राम सोना मिलेगा।
अनुमानित रिटर्न 5.2% होने का अनुमान है
हालांकि ज़रूरी नहीं कि, हर साल हिस्टॉरिकल 18.6% रिटर्न मिले। इसलिए, अलग-अलग सालाना रिटर्न के आधार पर साल 2036 में संभावित कीमत इमेज में दिखाई गई, वैसी हो सकती है।

वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के GLTER मॉडल के अनुसार, साल 2025 और साल 2040 के बीच सोने का औसत अनुमानित रिटर्न हर साल 5.2% होने का अनुमान है।
सोने की चाल तय करने वाले ‘मुख्य कारण’
सोने की कीमतें कभी भी सीधी लाइन में नहीं चलतीं, बल्कि लगातार ऊपर-नीचे होती रहती हैं। इसकी चाल तय करने वाले मुख्य कारण (US फेडरल रिजर्व के इंटरेस्ट रेट के फैसले, US डॉलर की मजबूती या कमजोरी, ग्लोबल महंगाई, जियोपॉलिटिकल टेंशन-जैसे युद्ध या झगड़ा और दुनिया भर के सेंट्रल बैंकों द्वारा सोने की खरीदारी) हैं।
ऐसे में अगर आप सिर्फ़ इन्वेस्टमेंट के मकसद से ज्वेलरी या सिक्कों के रूप में फिजिकल सोना खरीद रहे हैं, तो आपका असल रिटर्न कम हो सकता है।
इसका मुख्य कारण यह है कि, खरीद पर 3% GST लगता है, मेकिंग चार्ज और वेस्टेज का एक्स्ट्रा खर्च जुड़ता है और इसके साथ ही, खरीदते और बेचते समय आपको कीमतों में अंतर (बाय-सेल स्प्रेड) का भी सामना करना पड़ता है।
कौन सा विकल्प सही है?
अगर आपका एकमात्र मकसद अपने इन्वेस्टमेंट से रिटर्न कमाना है, तो फिजिकल गोल्ड के बजाय गोल्ड ETF, डिजिटल गोल्ड, या गोल्ड म्यूचुअल फंड जैसे पेपर/डिजिटल ऑप्शन पर विचार करना ज़्यादा फायदेमंद हो सकता है।
