गोल्ड मार्केट में एक कहावत अक्सर सुनी जाती है, “सोना हमेशा चार कदम आगे और दो कदम पीछे चलता है।” सोने की कीमतों में हाल ही में आई मामूली गिरावट उसी ‘दो कदम पीछे’ वाली प्रक्रिया है, जिसने इन्वेस्टर्स और बायर्स को कन्फ्यूज कर दिया है। सबके मन में बस यही सवाल है कि, क्या उन्हें अभी सोना खरीदना चाहिए या बेचना चाहिए?
Gold की कीमतें करीब 16% बढ़ी
गोल्ड मार्केट में इन दिनों ज़बरदस्त एक्शन देखने को मिल रहा है। पिछले एक महीने में गोल्ड की कीमतें करीब 16% बढ़ी हैं। वहीं, पिछले एक हफ्ते में ही इसमें 7% से ज़्यादा की बढ़ोतरी हुई है।
कमज़ोर डॉलर, ग्लोबल अनिश्चितताओं और सेंट्रल बैंकों द्वारा ETF की भारी खरीदारी ने इसे मज़बूत सपोर्ट दिया है। आने वाले फेस्टिव सीजन को देखते हुए डिमांड और बढ़ने की उम्मीद है।
ग्लोबल और घरेलू मार्केट में सोना अभी भी अपने रिकॉर्ड हाई से करीब 14 से 15 परसेंट नीचे है। इससे इन्वेस्टर्स के मन में यह सवाल उठ रहा है कि, क्या सोने में कोई बड़ी रैली बाकी है? हालांकि, पिछले हफ्ते शुक्रवार, 28 अगस्त को घरेलू मार्केट में बड़ा ट्विस्ट देखने को मिला।
दिल्ली के बुलियन मार्केट में 99.9 परसेंट प्योरिटी वाला सोना 3,300 रुपये की भारी गिरावट के साथ 1,62,400 रुपये प्रति 10 ग्राम पर आ गया, जो सिर्फ 3 दिनों में करीब 3 परसेंट का बड़ा करेक्शन है।
क्या सोना नया रिकॉर्ड बनाने की तैयारी में है?
इसके साथ ही MCX फ्यूचर्स मार्केट में भी लगातार चौथे दिन सुस्ती रही, जहां अक्टूबर और दिसंबर डिलीवरी वाले सोने की कीमतों में भी अच्छी गिरावट दर्ज की गई।
एक तरफ त्योहारों की उम्मीदें और दूसरी तरफ इस अचानक आई गिरावट ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। अब यह देखना काफी दिलचस्प होगा कि, क्या यह सिर्फ प्रॉफिट बुकिंग है या सोना फिर से नया रिकॉर्ड बनाने की तैयारी में है?
एक्सपर्ट नितिन केडिया का मानना है कि, सोना हमेशा चार कदम आगे और दो कदम पीछे चलता है। हाल ही में कीमतों में जो थोड़ी मंदी आई है, वह दो कदम पीछे हटने का मामला है। पिछले 15 से 20 दिनों में सोने ने इंडियन करेंसी के हिसाब से जबरदस्त रिटर्न दिया है।
आउटलुक आंखें खोल देगा
मार्केट का आउटलुक काफी मजबूत है, क्योंकि अब त्योहारों का सीजन आ रहा है। दशहरा, दिवाली और नवरात्रि जैसे बड़े त्योहारों के बाद शादियों का सीजन शुरू होगा।
एक्सपर्ट्स के मुताबिक, भले ही इस समय फिजिकल गोल्ड की बिक्री थोड़ी शांत है लेकिन मार्केट में पूछताछ और फॉरवर्ड बुकिंग काफी मजबूत हैं। इसलिए, सोने की कीमतों में गिरावट की संभावना नहीं है। इसे खरीदने के एक बेहतरीन मौके के तौर पर देखा जाना चाहिए।
SS वेल्थ स्ट्रीट की फाउंडर सुगंधा सचदेवा के मुताबिक, सोना सिर्फ एक इन्वेस्टमेंट नहीं है, बल्कि आपके पोर्टफोलियो को सुरक्षित रखने का एक बेहतरीन टूल है।
पिछले 20 सालों के हिस्टोरिकल डेटा और CAGR रिटर्न से पता चलता है कि, सोने ने ज्यादातर समय महंगाई दर से औसतन 3 प्रतिशत ज्यादा रिटर्न दिया है।
‘Gold’ महंगाई से लड़ने का मजबूत हथियार
खास बात यह है कि, ‘सोना’ महंगाई से लड़ने का एक मजबूत हथियार है। दूसरी बात, जब भी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपये की कीमत घटती है, तो सोना आपके पोर्टफोलियो को करेंसी लॉस से बचाता है। साल 2016 से सोने ने लगातार मजबूत रिटर्न दिया है।
उन्होंने यह भी कहा कि, सोने का सीधा संबंध US इंटरेस्ट रेट से है। सोने पर कोई इंटरेस्ट नहीं मिलता। ऐसे में जब इंटरेस्ट रेट बढ़ते हैं, तो सोना रखने की अपॉर्चुनिटी कॉस्ट बढ़ जाती है और कीमतों पर दबाव आता है।
हालांकि, अमेरिका में फिलहाल रेट बढ़ने की कोई उम्मीद नहीं है, जो सोने के लिए बहुत सपोर्टिव फैक्टर है। दुनिया भर में डॉलर का दबदबा अब धीरे-धीरे कम हो रहा है।
करेंसी का दबदबा और सोने को फायदा
इतिहास गवाह है कि, किसी भी करेंसी का दबदबा करीब 80 साल तक रहता है। अब दुनिया मल्टीपोलर दुनिया की ओर बढ़ रही है। ईरान ने कहा है कि, वह डॉलर के बजाय युआन में टोल चार्ज लेगा।
शॉर्ट में, फिलहाल कोई मजबूत अल्टरनेटिव करेंसी नहीं है जो डॉलर की जगह ले सके, इसलिए सोने को सबसे ज्यादा फायदा होगा। मार्केट एक्सपर्ट नितिन खंडेलवाल भी सोने को लेकर काफी पॉजिटिव हैं।
उनका कहना है कि, दुनिया में अभी तक कोई एक अल्टरनेटिव करेंसी डेवलप नहीं हुई है, जिस पर हर देश विश्वास करता हो। सोना ही अकेली ऐसी करेंसी है जो दुनिया के 200 देशों में बिना किसी रुकावट के चलती है।
$6,000 प्रति औंस का टारगेट
दुनिया के किसी भी देश की इकॉनमी में चाहे जैसी भी सिचुएशन हो, सोने की डिमांड और बढ़ोतरी लगातार बनी रहती है।
अगर टेक्निकल्स और एक्सपर्ट्स और बड़े फाइनेंशियल एक्सपर्ट्स की स्टडीज़ को देखें तो आने वाले समय में सोना इंटरनेशनल मार्केट में $6,000 प्रति औंस का टारगेट भी छू सकता है।
कुछ चर्चाएँ $10,000 से $15,000 के बारे में भी हो रही हैं लेकिन अभी यह कहना थोड़ा जल्दबाज़ी होगी। दुनिया भर में अनिश्चितताओं, मज़बूत डिमांड और सेंट्रल बैंकों की लगातार खरीदारी को देखते हुए, यह साफ़ है कि, सोने में अभी भी बहुत तेज़ी बाकी है।
सभी खबरें और फ़ैक्टर सोने को पॉज़िटिव दिशा में ले जा रहे हैं। इसलिए, यह सोना बेचने का नहीं बल्कि सही कीमत पर इन्वेस्टमेंट बनाए रखने या खरीदने का समय है।
