अगर हर महीने आपकी इनकम का एकमात्र सोर्स आपकी सैलरी है, तो आपके लिए हर महीने एक्स्ट्रा इनकम जनरेट करना बहुत ज़रूरी हो जाता है। ऐसे में सिर्फ़ सैलरी पर निर्भर रहने के बजाय, पैसिव इनकम का सोर्स जेनरेट करके आप घर के रोज़ के छोटे-बड़े खर्चे आसानी से पूरे कर सकते हैं और अपनी सैलरी के पैसे भविष्य के लिए बचा सकते हैं।
यदि आपकी मासिक आय का स्रोत केवल वेतन है, तो आपको कुछ पैसे ऐसे स्थान पर रखने चाहिए जहां आप आगे जाकर अतिरिक्त पैसा कमा सकें। इसका मतलब यह है कि, हर छोटे-बड़े खर्च के लिए सिर्फ सैलरी पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा।
AMFI-रजिस्टर्ड म्यूचुअल फंड डिस्ट्रीब्यूटर ने 3 इन्वेस्टमेंट ऑप्शन बताए हैं, जो आपको अपने लिए पैसिव इनकम जनरेट करने में मदद कर सकते हैं। इन तरीकों से, आप इस एक्स्ट्रा इनकम का इस्तेमाल घर के खर्चों के लिए कर सकते हैं और अपनी सैलरी से मिलने वाले पैसे को सेविंग्स या इन्वेस्टमेंट में इन्वेस्ट कर सकते हैं।
1. REITs
पहला ऑप्शन REITs यानी रियल एस्टेट इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट है। इसमें आप भारत में कमर्शियल रियल एस्टेट का हिस्सा खरीद सकते हैं। बदले में आपको किराए का हिस्सा मिलता है। एक्सपर्ट्स के मुताबिक, REITs का एवरेज रिटर्न 6 से 8% सालाना हो सकता है। इस तरह बिना कोई कमर्शियल प्रॉपर्टी खरीदे आप कमर्शियल रियल एस्टेट में इन्वेस्ट कर सकते हैं और उससे होने वाले किराए में हिस्सा पा सकते हैं।
2. कॉर्पोरेट बॉन्ड
दूसरा ऑप्शन कॉर्पोरेट बॉन्ड है। इसमें कंपनियां आम लोगों से लोन लेती हैं और बदले में उन्हें एक तय ब्याज देती हैं। एक्सपर्ट्स के मुताबिक, कॉर्पोरेट बॉन्ड पर सालाना 8 से 12% का ब्याज मिल सकता है। हालांकि, उन्होंने इसमें एक ज़रूरी बात ध्यान रखने को कहा है।
उनका कहना है कि, जिस बॉन्ड में इन्वेस्टमेंट किया जा रहा है, उसकी रेटिंग ट्रिपल B (BBB) से ऊपर होनी चाहिए। अगर ऐसा नहीं होता है, तो आपका पैसा फंस सकता है। इसलिए, रेगुलर इनकम के लिए कॉर्पोरेट बॉन्ड चुनते समय रेटिंग पर ध्यान देना ज़रूरी है।
3. आर्बिट्रेज फंड
तीसरा ऑप्शन आर्बिट्रेज फंड है। यह एक तरह का म्यूचुअल फंड है। इसमें फंड मैनेजर एक मार्केट में शेयर खरीदता है और उसी शेयर को दूसरे मार्केट में बेचता है। दोनों जगहों पर शेयर की कीमत के अंतर से जो प्रॉफिट होता है, वही उनका प्रॉफिट होता है।
एक्सपर्ट्स के मुताबिक, आर्बिट्रेज फंड का एवरेज रिटर्न 6 से 7% हो सकता है। हालांकि, उनके मुताबिक, इसका सबसे बड़ा फायदा सिर्फ रिटर्न ही नहीं, बल्कि इसका टैक्स ट्रीटमेंट भी है। एक साल बाद इक्विटी म्यूचुअल फंड के हिसाब से इसके प्रॉफिट पर 12.5% टैक्स लगता है। यह टैक्स 1 लाख रुपये से ज़्यादा के प्रॉफिट वाले शेयरों पर लगता है।
‘3 ऑप्शन’ बताए गए
इस तरह, AMFI-रजिस्टर्ड म्यूचुअल फंड डिस्ट्रीब्यूटर ने रेगुलर इनकम के लिए REITs, कॉर्पोरेट बॉन्ड और आर्बिट्रेज फंड को तीन ऑप्शन के तौर पर बताया है। इससे होने वाली इनकम का इस्तेमाल महीने के खर्चों के लिए किया जा सकता है, जबकि सैलरी बचाई जा सकती है।
