जब देश की सत्ता और सिस्टम में बैठे लोग आम जनता, खासकर युवाओं की तकलीफों से इतने दूर हो जाएं कि उन्हें युवाओं का दर्द सिर्फ ‘शोर’ लगने लगे, तब जन्म होता है एक ऐसे आंदोलन का जो इतिहास बदल देता है। आज भारत की सड़कों पर जो ‘कॉकरोच पार्टी’ का ‘आंदोलन’ (Cockroach Protest) दिख रहा है, वह इसी सिस्टम के अहंकार के खिलाफ फूटा हुआ एक जन-आक्रोश है।
जिस युवा पीढ़ी को देश का भविष्य कहा जाता है, जब देश की शीर्ष अदालत और सरकार उन्हें “कॉकरोच” और “समाज का परजीवी” कहकर उनका अपमान करने लगे, तो लोकतंत्र में इससे शर्मनाक और कुछ नहीं हो सकता। सरकार भूल गई कि, जब आप किसी को दीवार से सटा देते हैं, तो उसके पास पलटकर वार करने के अलावा कोई रास्ता नहीं बचता।
सोशल मीडिया का मज़ाक, अब सड़कों पर सरकार का सिरदर्द
अभिजीत दिपके द्वारा शुरू की गई ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) को शुरुआत में सरकार ने सिर्फ एक ‘इंटरनेट मीम’ या सोशल मीडिया का मज़ाक समझकर हवा में उड़ा दिया था। हालाँकि आज CJP के इंस्टाग्राम पर देश की बड़ी-बड़ी राजनीतिक पार्टियों से ज़्यादा फॉलोअर्स हो चुके हैं और दिल्ली का जंतर-मंतर युवाओं के हुजूम से पट गया है, तो सरकार के हाथ-पैर फूल रहे हैं।
यह आंदोलन अब सिर्फ एक पैरोडी नहीं है। यह इस देश के करोड़ों बेरोज़गार और हताश युवाओं की आवाज़ बन चुका है।
आखिर युवा सड़कों पर क्यों हैं?
यह आंदोलन बिना किसी वजह के खड़ा नहीं हुआ है। इसके पीछे सरकार की वो नीतियां हैं, जिन्होंने युवाओं के भविष्य को अधर में लटका दिया है।
- कागज़ लीक का अंतहीन सिलसिला: NEET जैसी देश की सबसे बड़ी परीक्षाओं में बड़े पैमाने पर धांधली और पेपर लीक ने लाखों छात्रों की सालों की मेहनत पर पानी फेर दिया। सरकार इन माफियाओं को रोकने में पूरी तरह नाकाम रही है।
- बेरोज़गारी का चरम: डिग्री हाथ में लेकर युवा दर-दर की ठोकरें खा रहे हैं लेकिन सरकार के पास रोज़गार के नाम पर सिर्फ खोखले वादे हैं।
- जवाबदेही का अभाव: इतने बड़े-बड़े घोटाले होने के बाद भी केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान अपने पद पर बने हुए हैं। सरकार में नैतिक ज़िम्मेदारी नाम की कोई चीज़ नहीं बची है।
सोनम वांगचुक का अनशन और सरकार की चुप्पी
इस आंदोलन को और बल तब मिला जब सोनम वांगचुक जैसे सम्मानित शिक्षा सुधारक जंतर-मंतर पर युवाओं के साथ अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठ गए। इसके बावजूद, सरकार के कानों पर जूं तक नहीं रेंग रही है। यह सरकार की असंवेदनशीलता की पराकाष्ठा है।
“तुम हमें कॉकरोच कहोगे, हम तुम्हारी सत्ता की नींव हिला देंगे!”
आज का युवा चुप बैठने वाला नहीं है। संसद मार्च से लेकर सड़कों पर हो रहे इन प्रदर्शनों ने यह साफ कर दिया है कि, युवाओं को अब खोखले भाषण नहीं, बल्कि रोज़गार, पारदर्शी परीक्षा प्रणाली और अपनी गरिमा वापस चाहिए।
सरकार को यह समझ लेना चाहिए कि, यह ‘कॉकरोच’ कहे जाने वाले युवा ही इस देश को चलाते हैं और अगर इनका गुस्सा इसी तरह भड़कता रहा, तो आने वाले समय में सरकार के लिए अपनी सत्ता बचाना मुश्किल हो जाएगा।
अब भी वक्त है, सरकार जागे, अपनी गलतियों को सुधारे और शिक्षा मंत्री का इस्तीफा लेकर युवाओं को उनका हक दे।
