अगर आप ‘वेलकम’ फ्रेंचाइजी के फैन हैं, तो ‘वेलकम टू द जंगल’ का इंतज़ार आप बेसब्री से कर रहे होंगे। अहमद खान के डायरेक्शन में बनी यह मल्टीस्टारर फिल्म थियेटर में आ चुकी है। चलिए बिना किसी सस्पेंस के आपको बताते हैं कि, यह फिल्म आपको देखनी चाहिए या नहीं?
स्टार्स की भारी फौज और ओवर-एक्टिंग का डोज़
फिल्म में एक्टर्स का पूरा मेला लगा हुआ है। इस बार नाना पाटेकर-अनिल कपूर की जगह सुनील शेट्टी और अरशद वारसी की जोड़ी आई है, जो स्क्रीन पर फुल-ऑन लाउड और क्रेजी कॉमेडी करती दिखती है। हमारे खिलाड़ी अक्षय कुमार अपने पुराने अतरंगी और कॉमिक अंदाज़ में वापस लौटे हैं।
अक्षय तो पूरी महफ़िल लूटने की कोशिश करते हैं। परेश रावल, राजपाल यादव और श्रेयस तलपड़े जैसे मंझे हुए कलाकार भी हैं लेकिन सितारों की इतनी भारी भीड़ है कि, दिशा पटानी और जैकलीन फर्नांडिस जैसी एक्ट्रेस को स्क्रीन पर चमकने का ज़्यादा मौका ही नहीं मिला।
पुरानी यादें, गानों का रीमिक्स और कड़क कैमियो
फिल्म की सबसे बड़ी ताकत इसका नॉस्टेल्जिया फैक्टर है। जब अक्षय कुमार ‘ऊँचा लंबा कद’ के रीमिक्स वर्जन पर थिरकते हैं, तो पुरानी यादें ताज़ा हो जाती हैं। फिल्म में पुराने पॉप-कल्चर, बॉलीवुड फिल्मों और यहाँ तक कि दलेर मेहंदी और कई ऐसे अतरंगी कैमियो एवं रेफरेंस डाले गए हैं, जो आपको कई जगह चौंकाएंगे और हंसाएंगे। रवीना टंडन का भी फिल्म में एक अलग ही स्वैग देखने को मिलता है।
कहाँ फिल्म रास्ता भटकी?
फिल्म का मिजाज काफी लाउड और अफरातफरी से भरा है। फरहाद सामजी की राइटिंग और कुछ बनावटी जोक्स फिल्म की रफ्तार को थोड़ा धीमा कर देते हैं। यह स्क्रिप्ट स्वर्गीय नीरज वोरा के एक कहानी के आइडिया पर आधारित है।
ख़ास बात यह है की, इसमें प्रेरणा के असली स्रोत बेन स्टिलर द्वारा निर्देशित और जैक ब्लैक व रॉबर्ट डाउनी जूनियर के साथ अभिनीत ‘ट्रॉपिक थंडर’ का कोई ज़िक्र नहीं किया गया है। ‘वेलकम टू द जंगल’ में जो कुछ भी हाथ लगा, उसे शामिल करके काम चलाने की कोशिश की गई है।
फाइनल वर्डिक्ट: देखें या छोड़ें?
अगर आप लॉजिक को घर पर रखकर सिर्फ अक्षय कुमार की मस्ती, पुरानी यादों और बिना दिमाग लगाए फुल टाइमपास करना चाहते हैं, तो यह फिल्म आपके लिए एक वन-टाइम वॉच साबित हो सकती है।

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