पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने बुधवार को इस बात से इनकार किया कि, पेट्रोल और डीज़ल की कीमतें बढ़ाने का कोई प्रस्ताव सरकार के विचाराधीन है। मंत्रालय ने मीडिया की उन रिपोर्टों को शरारतपूर्ण और गुमराह करने वाला बताया, जिनमें चुनाव के बाद कीमतों में बढ़ोतरी का सुझाव दिया गया था।
मंत्रालय ने एक आधिकारिक बयान में कहा, “कुछ खबरें ऐसी हैं जिनमें पेट्रोल और डीज़ल की कीमतों में बढ़ोतरी का सुझाव दिया गया है। इस संबंध में यह स्पष्ट किया जाता है कि, सरकार के विचाराधीन ऐसा कोई प्रस्ताव नहीं है।” मंत्रालय ने आगे कहा, “इस तरह की खबरें नागरिकों के बीच डर और घबराहट पैदा करने के मकसद से फैलाई जा रही हैं और ये शरारतपूर्ण तथा गुमराह करने वाली हैं।”
FAKE NEWS
There are some news reports suggesting a price hike of petrol and diesel. It is hereby clarified that there is no such proposal under consideration by the Government.
Such news items are designed to create fear and panic amongst the citizens and are mischievous and… pic.twitter.com/yTAfJdah2o— Ministry of Petroleum and Natural Gas #MoPNG (@PetroleumMin) April 23, 2026
भारत में ईंधन की कीमतों का रिकॉर्ड
मंत्रालय ने बताया कि भारत एकमात्र ऐसा देश है, जहाँ पिछले चार वर्षों में पेट्रोल और डीज़ल की कीमतों में कोई बढ़ोतरी नहीं हुई है। बयान में कहा गया, “भारत सरकार और तेल PSUs (सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों) ने अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में कीमतों में होने वाली भारी बढ़ोतरी से भारतीय नागरिकों को बचाने के लिए लगातार कदम उठाए हैं।”
वैश्विक असर को कम करने के उपाय
मंत्रालय ने कहा कि, भारत सरकार और सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियों ने अंतरराष्ट्रीय ईंधन की कीमतों में भारी बढ़ोतरी से नागरिकों को बचाने के लिए “लगातार कदम” उठाए हैं। इन प्रयासों के तहत, केंद्र सरकार ने पहले ही कच्चे तेल की कीमतों में अचानक आई तेज़ी से उपभोक्ताओं और तेल कंपनियों, दोनों को बचाने के लिए हस्तक्षेप किया था; भारतीय रिफाइनरों के लिए कच्चे तेल की कीमतें एक महीने में 62% तक बढ़ गई थीं।
सरकार ने पेट्रोल और डीज़ल पर एक्साइज़ ड्यूटी में 10 रुपये प्रति लीटर की कटौती की, जबकि इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन, हिंदुस्तान पेट्रोलियम और भारत पेट्रोलियम जैसे ईंधन खुदरा विक्रेताओं को पेट्रोल पर लगभग 24 रुपये प्रति लीटर और डीज़ल पर 30 रुपये प्रति लीटर का नुकसान हो रहा था।
राजस्व के नुकसान की भरपाई के लिए सरकार ने डीज़ल पर 21.5 रुपये प्रति लीटर और एविएशन टर्बाइन फ्यूल पर 29.5 रुपये प्रति लीटर का निर्यात शुल्क लगाया, साथ ही एक विंडफॉल टैक्स भी लागू किया। निर्मला सीतारमण के बयानों के अनुसार, इस कदम का उद्देश्य वैश्विक उतार-चढ़ाव के बावजूद घरेलू कीमतों को स्थिर रखना सुनिश्चित करना था, भले ही इससे राजकोष पर काफी बोझ पड़ा हो। अधिकारियों ने बताया कि जहाँ एक्साइज़ ड्यूटी में कटौती से 7,000 करोड़ रुपये से अधिक का राजस्व नुकसान हुआ, वहीं निर्यात शुल्क ने इसकी आंशिक भरपाई करने में मदद की।

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