मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज लिमिटेड (MOFSL) की ‘H1 2026 प्रीशियस मेटल्स आउटलुक’ रिपोर्ट के अनुसार, सोने की कीमतें फिर से बढ़ने से पहले थोड़े समय के लिए 8% तक गिर सकती हैं।
हालांकि ब्रोकरेज फर्म सोने की कीमतों में लंबी अवधि में बढ़ोतरी की उम्मीद कर रही है। ब्रोकरेज फर्मने निवेशकों को सलाह दी है कि, वे जल्दबाजी में नई खरीदारी न करें और इसके बजाय धीरे-धीरे निवेश करने का तरीका अपनाएं।
सोने की कीमत में गिरावट आ सकती है
रिपोर्ट में कहा गया है कि, USD 4,800 (Rs 4,56,564.24) के टारगेट तक पहुँचने से पहले सोने की कीमत में मौजूदा स्तरों से 6-8 प्रतिशत की गिरावट (करेक्शन) आ सकती है। इसके बाद 12-15 महीनों में यह USD 5,500+ (Rs 5,23,146.53) तक पहुँच सकता है।
मीडियम-टर्म प्राइस टारगेट
भारतीय निवेशकों के लिए, अगर USD/INR एक्सचेंज रेट 95.5 पर बना रहता है, तो MOFSL ने ₹1,33,000 और ₹1,30,000 के बीच एक ‘एक्युमुलेशन ज़ोन’ (खरीदने का दायरा) की पहचान की है। उसे उम्मीद है कि, यह कीमती धातु मीडियम-टर्म प्राइस टारगेट ₹1,68,000 और बाद में ₹1,93,000 की ओर बढ़ेगी।
ब्रोकरेज ने बताया कि, सोने की कीमतों पर असर डालने वाले कारक बदल गए हैं। अब जियो-पॉलिटिकल तनाव की वजह से इस ‘सेफ-हेवन’ एसेट (सुरक्षित निवेश) में हमेशा मुनाफ़ा नहीं मिलता।
रिपोर्ट के मुताबिक, साल 2026 की दूसरी तिमाही के दौरान बाज़ार की धारणा में काफ़ी बदलाव आया साल की शुरुआत में सोने की स्थिति मज़बूत रही। इसकी वजहों में टैरिफ़ को लेकर अनिश्चितता, एक्सचेंज-ट्रेडेड फंड्स (ETFs) में अच्छा निवेश आना, सेंट्रल बैंक की लगातार खरीदारी और यह उम्मीद कि US फ़ेडरल रिज़र्व ब्याज दरें कम करेगा।
सोने का आकर्षण कम हो गया
हालांकि, टैरिफ़ से जुड़ी चिंताओं और US-ईरान टकराव की वजह से महंगाई का दबाव बढ़ने पर लोगों की सोच बदली। निवेशकों को लगने लगा कि, US में ब्याज दरें लंबे समय तक ऊंची बनी रहेंगी, जिससे रियल ट्रेज़री यील्ड में बढ़ोतरी हुई और US डॉलर मज़बूत हुआ। इन घटनाक्रमों के कारण एक पारंपरिक सुरक्षित निवेश के तौर पर सोने का आकर्षण कम हो गया।
MOFSL का सुझाव है कि, मार्केट के सबसे निचले स्तर (बॉटम) का इंतज़ार करने के बजाय धीरे-धीरे खरीदारी करें। MOFSL का मानना है कि, मार्केट के सबसे निचले स्तर का पता लगाने की कोशिश करने के बजाय, अगर कीमतें और गिरती हैं तो निवेशकों को धीरे-धीरे सोना जमा करना चाहिए।
ब्रोकरेज हाउस ने 2 बातों की ओर इशारा किया
ब्रोकरेज हाउस ने कहा, “सोने में लंबे समय के निवेश का आधार अभी भी मजबूत है। आने वाले साल में जल्दबाजी के बजाय धैर्य रखने की ज़रूरत है।” उन्होंने दो मुख्य बातों की ओर इशारा किया एक तो US में महंगाई की दिशा और दूसरा नए नेतृत्व के तहत फेड (Fed) के ब्याज दरों से जुड़े फैसले।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि, जब तक असल ब्याज दरों में उल्लेखनीय गिरावट नहीं आती, तब तक सोने की कीमत सीमित दायरे में रहने या उसमें 6-8 प्रतिशत की और गिरावट आने की संभावना है।
ऐसे माहौल में, एकमुश्त निवेश करने के बजाय कीमतों में गिरावट के दौरान धीरे-धीरे खरीदारी करना ज़्यादा असरदार तरीका साबित हो सकता है।
चांदी में निवेश करने वालों को ज़्यादा उतार-चढ़ाव के लिए तैयार रहना चाहिए
हालांकि निकट भविष्य में कमजोरी की संभावना है, फिर भी MOFSL अगले 12 से 15 महीनों के लिए सोने को लेकर सकारात्मक बना हुआ है। उनका मानना है कि, कुछ खास संरचनात्मक कारक लंबी अवधि में सोने की कीमतों को ऊपर ले जाने में मदद करेंगे।
रिपोर्ट में कहा गया है, “जिन लोगों का नजरिया 12 से 15 महीने का है, उन्हें मौजूदा कमजोरी को बाजार से बाहर निकलने के बजाय निवेश का मौका मानना चाहिए।
ऐसा इसलिए है, क्योंकि सोने को केंद्रीय बैंकों की खरीद और विकसित अर्थव्यवस्थाओं में राजकोषीय स्थिति बिगड़ने से संरचनात्मक समर्थन मिल रहा है, साथ ही मुद्रा के अवमूल्यन के खिलाफ बचाव के रूप में इसकी भूमिका भी बनी हुई है।”
ब्रोकरेज फर्म ने चांदी में निवेश करने वालों को भी आगाह किया है। उनका कहना है कि, चांदी की मांग का स्वरूप अनूठा है। इसलिए इसकी कीमतों में ज़्यादा उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है।
फर्म ने निवेशकों को चांदी की कीमतों में होने वाले उतार-चढ़ाव के प्रति सतर्क रहने की सलाह दी है, “क्योंकि चांदी की दोहरी भूमिका है। यह एक कीमती धातु भी है और विद्युतीकरण की मांग से जुड़ी औद्योगिक धातु भी।”
