Former India captain Ajinkya Rahane announces retirement from international cricket

भारत के अनुभवी बल्लेबाज़ अजिंक्य रहाणे ने इंटरनेशनल क्रिकेट से संन्यास का ऐलान कर दिया है। उन्होंने सोशल मीडिया पर अपने फ़ैन्स के लिए एक भावुक संदेश शेयर करके इस फ़ैसले की आधिकारिक घोषणा की है। 38 साल की उम्र में रहाणे ने अपने शानदार इंटरनेशनल क्रिकेट करियर को अलविदा कह दिया।

अनुभवी बल्लेबाज़ ने सोशल मीडिया पर फ़ैन्स के साथ एक संदेश शेयर किया, जिसमें वे भावुक नज़र आए। उन्होंने भारतीय टीम के साथ बिताए अपने समय और देश के लिए अपना सब कुछ झोंक देने के बारे में बात की। बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफ़ी 2020-21 के सबसे बड़े नायकों में से एक, रहाणे ने ऑस्ट्रेलिया में मिली उस सीरीज़ जीत के साथ भारतीय क्रिकेट के इतिहास में अपना नाम दर्ज कराया।

वीडियो मैसेज में रहाणे ने बताया कि, उनके करियर में आगे बढ़ने का यह सही समय है। हालांकि वह अपने खेलने के करियर को अलविदा कह रहे हैं लेकिन वह इस खेल से गहराई से जुड़े रहना चाहते हैं।

रिटायरमेंट की घोषणा

रहाणे ने क्लिप में कहा, “ज़िंदगी की सच्चाई यही है कि, हर चीज़ की शुरुआत होती है और हर चीज़ का अंत भी होता है। जब सही समय आता है, तो आपको बस उसका सम्मान करना होता है और आगे बढ़ना होता है। मैंने अपनी बैटिंग में हमेशा सही समय (टाइमिंग) पर भरोसा किया है और हमेशा इसके महत्व को समझा है। आज मुझे लगता है कि, मेरे आगे बढ़ने और इंटरनेशनल क्रिकेट के सभी फ़ॉर्मेट से रिटायरमेंट की घोषणा करने का सही समय आ गया है। डोम्बिवली से एक युवा लड़के के तौर पर सिर्फ़ प्रैक्टिस के लिए सफ़र करने के शुरुआती दिनों से लेकर अब तक, मैंने इस खेल को अपना सब कुछ दिया है।”

रहाणे का करियर

भारतीय टीम के सबसे मज़बूत और मुश्किल हालात में डटे रहने वाले बल्लेबाज़ों में से एक माने जाने वाले रहाणे ने जब भी टीम इंडिया का प्रतिनिधित्व करने का मौका मिला, तो निस्संदेह अपना सब कुछ झोंक दिया। अपने पूरे करियर में 38 वर्षीय खिलाड़ी ने कुल 85 टेस्ट, 90 वनडे और 20 T20I मैच खेले।

इन 195 मैचों में रहाणे ने कुल 8,414 रन बनाए, जिनमें से 5,077 रन खेल के सबसे लंबे फ़ॉर्मेट (टेस्ट) में आए। उन्होंने छह अलग-अलग फ़्रैंचाइज़ी के लिए 212 IPL मैच भी खेले।

साल 2013 में ऑस्ट्रेलिया के ख़िलाफ़ सीरीज़ के लिए भारतीय टेस्ट टीम में जगह बनाने के बाद उन्होंने जल्द ही आने वाले वर्षों के लिए टीम के एक अहम सदस्य के तौर पर अपनी पहचान बना ली।

वह टेस्ट टीम के लिए मध्य-क्रम के एक महत्वपूर्ण बल्लेबाज़ बन गए और विदेशी परिस्थितियों में शानदार प्रदर्शन करते हुए अपने 12 टेस्ट शतकों में से आठ शतक घर से बाहर बनाए।

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