सितंबर 2026 के आखिर में भारतीय बाजार में सोने की कीमतों में भारी गिरावट देखने को मिल रही है। 24 कैरेट सोना ₹1.48 लाख से ₹1.52 लाख प्रति 10 ग्राम के आसपास ट्रेड कर रहा है, जबकि MCX पर अक्टूबर और दिसंबर का फ्यूचर प्राइस ₹1.47 लाख के आसपास है।
क्या सोना ₹1 लाख से नीचे गिर सकता है?
वहीं, सोमवार, 28 सितंबर को एक ही दिन में ₹4,000 तक की गिरावट आई। इंटरनेशनल मार्केट में सोने (XAU/USD) की कीमत $4,142.32 के आसपास है। ऐसे में ज़्यादातर ट्रेडर्स को उम्मीद है कि, यह $4,000 तक गिर जाएगी।
अब सवाल यह है कि, क्या सोना ₹1 लाख प्रति 10 ग्राम से नीचे गिर सकता है? फिलहाल तो एक्सपर्ट्स को नहीं लगता कि, भविष्य में ऐसा हो पाएगा।
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— FXStreet News (@FXStreetNews) September 28, 2026
हालांकि वे इसे नामुमकिन भी नहीं मानते। इसके साथ ही, सोने की चमक फीकी पड़ने के 3 मुख्य कारण सामने आए हैं।
3 मुख्य कारण
पहला कारण US ट्रेजरी यील्ड और फेड की ब्याज दरें हैं। 10-साल का US बॉन्ड यील्ड लगभग 5.2% पर पहुँच गया है, जो कई सालों में सबसे ऊँचा स्तर है। फेड द्वारा रेट बढ़ाने की उम्मीदों पर यील्ड असल में बढ़ रही है।
कारण यही है कि, ‘गोल्ड’ पर कोई इंटरेस्ट नहीं मिलता, इसलिए ज़्यादा यील्ड इसे कम आकर्षक बनाती है। मज़बूत डॉलर भी इंटरनेशनल कीमतों पर दबाव डालता है।
सोने और कच्चे तेल के बीच ‘नेगेटिव कोरिलेशन’
सोने को आम तौर पर महंगाई से बचाव का ज़रिया माना जाता है। कच्चे तेल के साथ सोना अक्सर बढ़ता है लेकिन होर्मुज स्ट्रेट (Hormuz Strait) में चल रही नाकाबंदी की वजह से सोने और कच्चे तेल के बीच नेगेटिव कोरिलेशन हो गया है।
अभी ब्रेंट क्रूड लगभग $110 प्रति बैरल है। तेल की ऊंची कीमतें महंगाई बढ़ा रही हैं, जिससे फेड को सख्त नीतियां अपनाने पर मजबूर होना पड़ रहा है। इस साइकिल का सोने और चांदी दोनों पर नेगेटिव असर पड़ रहा है।
The price of #gold is typically correlated with oil because gold is a hedge against inflation, and oil has a strong impact on the price of everything.
What’s strange is that the price of gold suddenly became negatively correlated with oil as soon as the Iran Conflict broke out.
At the same time, gold began hemorrhaging out of the US.
I happen to think a deal might have been made with China to import less oil (to keep the price down) in exchange for buying gold.
Full report: https://t.co/4xy2406vIP
— Chris Martenson (@chrismartenson) September 24, 2026
₹1.30-1.32 लाख का अनुमान
इंटरनेशनल स्पॉट गोल्ड अभी सात हफ़्तों के सबसे निचले स्तर $4,130-$4,150 प्रति औंस पर है। ETF के निकलने और इन्वेस्टर की कमज़ोर मांग के कारण घरेलू बाज़ार में भी बिकवाली का दबाव देखा जा रहा है।
नवीन दमानी (मोतीलाल ओसवाल) जैसे कुछ एनालिस्ट ने पहले ₹1.30-1.32 लाख प्रति 10 ग्राम तक करेक्शन का अनुमान लगाया था, जिसे लॉन्ग-टर्म इन्वेस्टर्स के लिए खरीदने का एक अच्छा मौका माना जा रहा था।
घरेलू कीमतें ₹1.40-1.60 लाख की रेंज में
टेक्निकल सपोर्ट की बात करें तो, सोना अभी ₹1.45-1.48 लाख और फिर ₹1.42-1.46 लाख के बीच बड़ा सपोर्ट दिखा रहा है।
इसके अलावा ज़्यादातर ब्रोकरेज हाउस का अनुमान है कि, साल 2026 के बाकी समय में घरेलू कीमतें ₹1.40-1.60 लाख की रेंज में रह सकती हैं।
दूसरी बात, जब तक इंटरनेशनल कीमतें $3,800-$4,000 तक नहीं गिरतीं और रुपया काफी कमज़ोर नहीं होता, तब तक कीमतों का पूरी तरह से ₹1 लाख से नीचे जाना इस स्टेज पर बेस केस नहीं है।
